वह ट्रेन जिसमें मुझे मिली मेरी फोन सेक्स की साथी

Desi sex talk, hindi sex stories: मेरा नाम रजत है मैंने कुछ समय पहले ही अपने कॉलेज की पढ़ाई पूरी की है। दोस्तों में ट्रेन में सफर कर रहा था उस सफर के दौरान मेरे सामने एक परिवार बैठा हुआ था और जब मेरी बात उस लड़की से हुई तो उसके बाद तो मुझे उसके बारे में सब कुछ पता चलने लगा। मैं अपने घर इंदौर वापस लौट चुका था, मेरी चेतना से बात होती रहती थी चेतना से मेरी मैसेज के माध्यम से ही बात हुई थी लेकिन कुछ समय से में चेतना से बात नहीं कर पा रहा था क्योंकि मैं बहुत ही ज्यादा व्यस्त हो गया था। मैं अपने पिताजी के कारोबार को संभालने लगा था काम से मुझे बिल्कुल भी फुर्सत नहीं मिल पाती थी इसलिए मुझे लगने लगा कि मैं शायद चेतना से बात नहीं कर पा रहा हूं। चेतना ने भी मुझसे बात करना बंद कर दिया था काफी समय तक हम लोग एक दूसरे से बात नहीं करते थे लेकिन कुछ दिनों पहले मुझे चेतना की बहुत जरूरत पड़ी। उस वक्त मैं अपने मोबाइल में पोर्न मूवी देख रहा था मुझे वह देखकर बहुत ही ज्यादा उत्तेजना जागने लगी मुझे लगा कि मुझे किसी से बात करनी चाहिए। मैंने चेतना को फोन किया तो उसने मेरा फोन उठा लिया और उसके बाद हमारी जो बातें हुई वह मैं आप लोगों को बताना चाहता हूं क्योंकि मुझे लगता है कि चेतना और मेरे बीच हुई बातें मुझे आपको बतानी चाहिए। हम दोनों ने एक दूसरे से रंगीन बातें की और हम लोगों ने एक दूसरे की खुशी का बहुत ध्यान रखा।

मैं- चेतना आज मैंने तुम्हें काफी समय बाद फोन किया और तुमने मेरा फोन भी उठा लिया।

चेतना- मैं अभी घर पर ही थी और तुम तो वैसे मुझे फोन करते नहीं हो लेकिन आज तुमने अचानक से मुझे फोन कर दिया और मैंने तुम्हारा फोन भी उठा लिया।

मैं- बस ऐसे ही तुमसे बात करने का मन हो रहा था तो सोचा तुम्हें फोन कर लू।

चेतना- इतने समय बाद तुम मुझसे बात ही नहीं कर रहे थे और तुम कुछ ज्यादा ही बिजी हो गए थे।

मैं- रचना मैं बिजी तो हो गया था लेकिन आज मुझे लगा कि मुझे तुमसे बात करनी चाहिए तो मैंने तुम्हें फोन कर दिया।

चेतना- अब बहुत देर हो चुकी है मै किसी और से ही प्यार करने लगी हूं और मुझे लगता है कि हम दोनों को आपस में बात भी नहीं करनी चाहिए।

मैं- चेतना ऐसा क्यों बोल रही हो ठीक है तुम किसी और को चाहने लगी हो तो उससे मुझे कोई आपत्ति नहीं है लेकिन हम लोग बात तो कर ही सकते हैं। तुम ही बताओ कि क्या हम लोग आपस में बात भी नहीं कर सकते।

चेतना- हां हम लोग आपस में बात कर सकते हैं मुझे उसमें कोई भी आपत्ति नहीं है लेकिन तुम मुझे यह बताओ कि तुमने मुझे इतने दिनों तक क्यों फोन नहीं किया और मेरा फोन भी तुम उठाते नहीं थे।

मैं- चेतना पिताजी के साथ काम में इतना बिजी हो गया था कि अपने लिए भी समय नहीं मिल पा रहा था तुमसे भी मैं बात नहीं कर पाया उसके लिए मैं तुमसे माफी मांगता हूं।

चेतना- चलो तुम्हें माफ कर दिया कम से कम तुम्हें अपनी गलती का एहसास तो है।

मैं- अच्छा तुम मुझे कुछ कह रही थी कि तुमने कोई बॉयफ्रेंड बना लिया है तुम्हारी उससे कैसे मुलाकात हुई और तुम्हारे बीच में क्या कुछ हुआ भी है?

चेतना- नहीं हम लोगों के बीच मे कुछ नहीं हुआ।

मैं- चेतना मुझसे क्यों तुम छुपा रही हो मुझे मालूम है कि तुम मुझसे झूठ कह रही हो तुम लोगों के बीच में जरूर कुछ ना कुछ तो हुआ है यदि तुम मुझे इस बारे में बता भी दोगी तो कौन सा मैं किसी को कुछ बताने वाला हूं। वैसे भी तो अब तुम मुझसे कहां बात करती हो और हम दोनों एक दूसरे से कम ही बात किया करते हैं।

चेतना- अभी कुछ दिनों पहले ही मेरे और उसके बीच शारीरिक संबंध बने थे उस वक्त उसने मेरी सील तोड़ दी थी।

मैं- अच्छा तो तुमने अपनी सील तुडवा ली है काश कि मुझे यह मौका मिल पाता।

चेतना- तुम्हें भी तो यह मौका में देने के लिए तैयार थी लेकिन तुमने तो मुझसे दूरी बना ली और उसके बाद से तुम्हारा कोई अता पता ही नहीं है तुम कहां हो। ना तो तुम मुझसे बात कर रहे थे और ना ही तुम मेरा फोन उठा रहे थे।

मैं- चेतना रहने भी दो तुम आगे की बात करो कैसे तुम्हारे और तुम्हारे बॉयफ्रेंड के बीच में क्या हुआ तुम मुझे बता सकती हो।

चेतना- देखो मैं तुम्हें कुछ बताना तो नहीं चाहती हूं लेकिन मुझे लग रहा है कि तुम्हें मैं बताऊंगी तो तुम्हें भी अच्छा लगेगा, मैंने उसके साथ मजे किए।

मैं- क्या तुमने उसके लंड को अपने मुंह में लिया था?

चेतना- हां मैंने उसके मोटे और काले लंड को भी अपने मुंह के अंदर लिया था और उसे चूसने में मुझे इतना आनंद आया कि मुझे लग रहा था कि मैं जैसे किसी आइसक्रीम को चूस रही हूं वह बहुत ज्यादा खुश था।

मैं- चेतना मै चाहता हूं मेरे लंड को भी तुम अपने मुंह में लेकर चूसो।

चेतना- नहीं मैं तुम्हारे लंड को नहीं चूस सकती क्योंकि मैं अपने बॉयफ्रेंड से बहुत प्यार करती हूं।

मैं- चेतना क्या तुम मेरे लिए इतना भी नहीं कर सकती।

चेतना- चलो ठीक है बाबा तुम्हारे लंड को भी अपने मुंह में ले लेती हूं और उसे भी सकिंग करती हूं  लेकिन तुमने तो मेरे साथ कुछ अच्छा नहीं किया पर मैं तुम्हारी इच्छा को जरूर पूरी कर सकती हूं।

मैं- हां तुम मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर बाहर करती रहो मुझे बड़ा अच्छा लग रहा है और ऐसे ही तुम उसे चूसती रहो।

चेतना- मुझे बहुत अच्छा लग रहा है और ऐसा लग रहा है जैसे तुम्हारा लंड मेरे गले के अंदर तक जा रहा है, मैंने अपनी चूत के अंदर भी उंगली डाली है मुझे बहुत मजा आ रहा है।

मैं- चेतना तुमने कौन से रंग की पैंटी पहनी हुई है?

चेतना- मैंने आज गुलाबी रंग की पैंटी पहनी हुई है और उस गुलाबी रंग की पैंटी में मेरी चूत से पानी टपकने लगा है मैं सोच रही हूं कि उसे मैं उतार देती हूं।

मै-  तुम अपनी पैंटी को उतार दो और अपनी चूत के अंदर उंगली डालकर पूरे मजे लो मुझे भी बहुत अच्छा लगेगा यदि तुम ऐसा करोगे।

चेतना- हां मैं अपनी पैंटी को उतार रही हूं, मैने अपनी पैंटी को उतार लिया है अब तुम मेरी चूत को भी चाट सकती हो।

मैं- यार तुम वाकई में बड़ी लाजवाब हो और तुम्हारा कोई जवाब नहीं है मुझे अपनी गलती का एहसास हो रहा है कि मैंने तुमसे बात क्यों नहीं की मुझे तुम्हारे साथ बात करनी चाहिए थी और यदि मैं तुमसे बात करता तो शायद तुम किसी और अपनी चूत भी नहीं मरवाती।

चेतना- तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो मुझे भी तो किसी की जरूरत थी और यदि तुम मुझसे बात करते तो मैं किसी और के साथ कभी भी शारीरिक संबंध नहीं बनाती लेकिन जिस प्रकार से मेरे बॉयफ्रेंड ने मुझे चोदा उससे मैं बहुत ज्यादा खुश हो गई थी क्योंकि उसने मेरे शरीर को हिला कर रख दिया था और मेरी चूत से पानी बाहर निकल रहा था उसे भी उसने अपनी जीभ से चाट लिया था। इस वक्त मैंने अपनी चूत के अंदर उंगली को घुसा रखा है।

मै- चेतना जब से तुमने अपनी चूत मरवाई है लगता है तुम्हारे अंदर कुछ ज्यादा ही आग पैदा होने लगी है तुम अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पा रही हो।

चेतना- हां मैं अपने आपको बिल्कुल भी नहीं रोक पा रही हूं क्योंकि मुझे लगता है कि जिस प्रकार से उसने मेरी इच्छा को पूरा किया था उस प्रकार से शायद ही कोई मेरी इच्छा को पूरा कर पाएगा और मुझे बड़ा अच्छा भी लग रहा है।

मैं- मैं अपने लंड को हिला रहा हूं और मुझे बड़ा अच्छा लग रहा है, मैं अपने लंड को हिला रहा हूं क्या मैं तुम्हारी चूत के अंदर अपने लंड को डाल दूं?

चेतना- हां क्यों नहीं तुम अपने लंड को मेरी चूत के अंदर प्रवेश करवा दो मुझे बहुत अच्छा लगेगा।

मैं- तुम्हारी चूत में लंड को घुसा दिया है अब तुम अपने पैरों को चौड़ा कर लो मैं भी तुम्हें बड़ी अच्छी तरीके से चोदूगा।

चेतना- तुम ऐसे ही मुझे चोदते रहो मुझे बड़ा मजा आया और ऐसे ही मेरे बॉयफ्रेंड ने मुझे चोदा था तुम्हारे साथ भी सेक्स करने में बड़ा मजा आ रहा है।

चेतना की गरमा गरम बातो ने मेर आग को बाहर निकाल दिया कुछ पता ही नहीं चला और उसके बाद चेतना मुझसे फोन पर तो बात करती थी लेकिन अब वह किसी और की हो चुकी है और मुझे उससे कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन वह मेरी हर जरूरतों को पूरा कर देती है।

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