हाथ में फोन था और गांड मे डिलडो था

Antarvasna, hindi sex talk: मनीषा मेरी दीदी की सहेली है हालांकि उम्र में वह मुझसे बड़ी है लेकिन जब भी वह हमारे घर आती तो उसे देखकर मेरे मन उसे चोदने का होता लेकिन मेरी दीदी के चलते मैं उस से कभी भी इस प्रकार की बातें ना कर सका। थोड़े ही समय पहले दीदी की शादी तय हो गई जब दीदी की शादी में मनीषा आई तो उसे देखकर मैं बड़ा ही खुश था मैंने भी मौका नहीं छोड़ा और उसकी गांड को मैंने अपने हाथ से जवाब दिया। जब मैंने उसकी गांड को दबाया तो वह मुझे देख कर मुस्कुराने लगी हालांकि मैं अभी भी दुविधा में था कि मुझे क्या करना चाहिए मैं उससे बात करूं या नहीं लेकिन मैंने मनीषा से बात करने के बारे में सोच लिया। दीदी की शादी अभी कुछ दिनों पहले ही हुई थी मुझे डर था कि कहीं मनीषा दीदी को यह बात ना बता दे इसलिए मैंने मनीषा से इस बारे में कुछ भी बात नहीं की थी लेकिन अब मैं मनीषा से बात करना चाहता था। जब मैंने उससे बात की तो मुझे बड़ा ही अच्छा लगा उससे बात कर के मै बड़ा खुश था मै मैसेज के माध्यम से मनीषा से बात करता मै मनीषा की चूत मारने के लिए बेताब था हालांकि एक बार हम दोनों के बीच काफी देर तक चुंबन भी हुआ लेकिन मनीषा की भी सगाई हो चुकी थी। वह अपने होने वाले पति के साथ बात करने लगी थी मैं मनीषा के लिए तड़प रहा था मैं चाहता था कि किसी भी प्रकार से मैं मनीषा से बात करूं। मैंने मनीषा को कई फोन किए लेकिन उसने मेरा फोन नहीं उठाया मैं इस बात से बहुत परेशान हो चुका था कि क्या मैं मनीषा से कभी बात कर पाऊंगा या नहीं परंतु थोड़े ही समय बाद उसकी शादी तय हो गई। ना तो मुझे मनीषा क चूत का सुख मिल पाया और ना ही उससे मैं बात कर पाया। मेरी भी अब जॉब लग चुकी थी मैं अपनी जॉब में ही बिजी था लेकिन एक दिन जब मैं घर लौटा तो उस दिन मनीषा का मुझे फोन आया मैंने उस वक्त मनीषा से कहा कि मैं तुम्हें रात को फोन करता हूं। मनीषा ने कहा ठीक है तुम मुझे रात के वक्त फोन करना रात के वक्त मैंने जब मनीषा को फोन किया तो उसके और मेरे बीच जो गरम बातें हुई वह मैं आप लोगों को बताता हूं कैसे हम दोनों के बीच गरमा गरम बातें हुई।

मैं- मनीषा कहो तुम्हें क्या कहना था तुमने मुझे फोन किया था क्या कोई जरूरी काम था और इतने समय बाद आखिर तुम्हें मेरी याद कैसे आ गई।

मनीषा- परस तुम्हें क्या बताऊं मुझे तुम्हारी याद कैसे आई।

मैं- मुझे तो लगा था कि तुम मुझे कभी याद भी नहीं करोगी लकिन तुमने फोन कर के मुझे तो पूरी तरीके से चौंका ही दिया।

मनीषा- जब से मेरी शादी हुई है तब से मैं बिल्कुल भी खुश नहीं हूं मेरे पति मेरा बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखते हैं और आए दिन हम दोनों के बीच झगड़े होते रहते हैं जिस वजह से मैं बहुत ज्यादा परेशान हो चुकी हूं और मुझे कई बार लगता है कि मैं शायद अब अपने पति को छोड़ दूं। जब मुझे तुम्हारा ध्यान आया तो मैंने तुम्हें फोन कर दिया।

मैं- क्या तुम इतनी ज्यादा परेशान हो चुकी हो मुझे तो लगा था कि तुम अपने पति के साथ बहुत खुश हो और तुम्हारे पति तुम्हारा बहुत ध्यान रखते होंगे लेकिन मुझे इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि तुम इतनी ज्यादा दुखी हो चुकी हो।

मनीषा- मेरे दुख का कारण बहुत ही बड़ा है मेरे पति ना तो मुझे प्यार करते है। रात को हम लोग बिस्तर पर होते हुए भी एक दूसरे के साथ अच्छे से समय नहीं बिता पाते हैं।

मैं- मनीषा अब इतनी बात हो ही चुकी है तो तुम्हें यह भी पता होगा कि मैं तुम्हारे पीछे बहुत ज्यादा पागल था और लेकिन मैं अपनी दीदी की वजह से तुम्हें कुछ कह ना सका परंतु तुम्हें आज क्या मेरे होने का एहसास हो गया है।

मनीषा- पारस मैं तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहती थी लेकिन मुझे लगता था कि मैं जिससे शादी करूं उसी से मैं सेक्स करू लेकिन जब मेरी शादी हुई तो तब मुझे एहसास हुआ कि मेरे पति और मेरे बीच बिल्कुल भी अच्छे संबंध नहीं है क्योंकि वह ना तो मुझे खुश रखने की कोशिश करते हैं और ना ही वह मेरी सेक्स की जरूरतों को अच्छे से पूरा कर पा रहे है इसीलिए तो मैं बहुत ज्यादा परेशान हो गई थी। मैं चाहती थी कि मैं तुम्हारे साथ सेक्स करू लेकिन मैं इस बात से घबरा रही थी कि क्या मैं तुमसे बात कर पाऊंगी आखिरकार मैंने तुमसे बात कर ही ली।

मैं- मनीषा इस बात को तुम छोड़ भी दो और तुम यह बताओ कि आज जब इतनी बात हो चुकी है तो मैं तुम्हारी गांड मारने के लिए बड़ा बेताब था क्या तुम वीडियो कॉल पर बात कर सकती हो?

मनीषा- हां क्यों नहीं मैं तुमसे अभी बात करती हूं  तुम फोन रखो मैं तुमसे अभी बात करती हूं।

मैं- मनीषा इतने समय बाद तुम्हें देख रहा हूं तो बहुत खुशी हो रही है तुम तो बिल्कुल भी नहीं बदली हो थोड़ा सा अपने पल्लू को नीचे कर के अपने स्तनों को तो मुझे दिखाओ मैं भी तो देखूं तुम्हारे स्तन कितने बड़े हो चुके हैं।

मनीषा- मैं तो तुम्हें अपने पूरे स्तनों को ही दिखा देती हूं मैं अपने पूरे कपड़े उतारती हूं तुम मुझे थोड़ा समय दो।

मैं- आज तुम्हारा नंगा बदन देख कर मुझे बड़ा अच्छा लग रहा है और ऐसा लग रहा है तुम्हारी चूत के अंदर अभी मै लंड घुसा दू। मेरे लंड से पानी निकल आया है और तुम्हारी चूत को देख कर मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैं बिल्कुल रह नहीं पाऊंगा क्या मैं तुम्हारी चूत के अंदर अपने लंड को डाल सकता हूं?

मनीषा- भला इसमें भी कोई पूछने की बात है तुम मेरी चूत के अंदर अपने लंड को डाल दो मेरी चूत अब तुम्हारी ही है क्योंकि मेरे पति से मुझे कोई उम्मीद ही नहीं रही उनका लंड बड़ा ही छोटा है। तुम भी तो मुझे अपने लंड को दिखाओ मैं भी तो तुम्हारे लंड को देखना चाहती हूं तुम्हारा लंड कितना मोटा है।

मैं- मैंने अपने लंड को तुम्हे दिखा दिया है तुम्हें अब तो पता चल चुका होगा कि मेरा लंड कितना मोटा है।

मनीषा- यार वाकई में तुम्हारा लंड बहुत मोटा है मैंने बहुत गलती की थी तुमसे अपनी चूत नहीं मरवा पाई लेकिन अब जब भी मैं तुम्हें मिलूंगी तो तुमसे अपनी चूत जरूर मरवाऊंगी तुम्हारे लंड को मैं अपनी चूत मे लेने के लिए बड़ी बेताब हूं और मुझे ऐसा लग रहा है कि जैसे तुम्हारे लंड को अपनी चूत में लेकर मैं अपनी पूरी गर्मी को मिटा दूंगी।

मैं- मजा तो मुझे भी बड़ा आ रहा है और ऐसा लग रहा है जैसे तुम्हारी चूत के अंदर अपने लंड को अभी डाल दूं। मैं अपने लंड को हिला रहा हूं तुम भी अपनी चूत पर थूक लगाते हुए अपनी उंगली को अंदर ले लो तुम्हें बड़ा ही मजा आएगा।

मनीषा- मेरे पास डिलडो है मैं उस डिलडो को अपनी चूत में ले लेती हूं।

मैं- तुम तो बड़ी ही ठरकी निकली तुमने अपने पास सब कुछ व्यवस्था रखी हुई है तुम्हारे पास डिलडो भी है यह तुम्हें किसने दिया?

मनीषा- यह डिलडो मैंने कुछ दिनों पहले ही मंगवाया था मेरी सहेली कुछ दिनों पहले विदेश गई थी मैंने उस से मंगवा लिया था। जब मैं अकेली होती हूं तो इसे मै अपनी चूत मे ले लेती हूं और अपनी इच्छा को मैं पूरी करने की पूरी कोशिश करती हूं जब भी मैं डिलडो को अपनी चूत में लेती हूं तो मेरी इच्छा पूरी हो जाती है।

मैं- मैंने तुम्हारी चूत के अंदर अपने लंड को डाल दिया अब तुम मेरे लंड को अपनी चूत के अंदर बाहर करते रहो तुम्हें बड़ा ही मजा आएगा। मेरे लंड को अपनी चूत के अंदर लेती रहो और अपनी चूत में तुम डिलडो को घुसाती रहो तुम्हारी इच्छा पूरी हो जाएगी।

मनीषा- मैंने अपनी चूत के अंदर डिलडो को डाल दिया है और अपनी चूत के अंदर डिलडो को बड़े ही मजे से ले रही हूं मेरी चूत से बहुत ज्यादा पानी निकल रहा है मुझे बहुत ही मजा आ रहा है तुम ऐसे ही मुझे चोदते रहो मेरे अंदर की गर्मी को तुमने आज पूरी तरीके से मिटा दिया है।

मैं- मनीषा तुम अपनी गांड के अंदर डिलडो डालो मैं तुम्हारी गांड को देखकर मुठ मारना चाहता हूं तुम्हारी गांड मारने कि मेरी बहुत इच्छा थी लेकिन मैं तुम्हारी गांड मार ना सका परंतु आज मैं तुम्हारी गांड मारना चाहता हूं।

मनीषा- मैंने डिलडो को अपनी गांड के अंदर घुसा लिया है मुझे डिलडो को अपनी गांड में लेने में मजा आ रहा है मैं पहली बार ही डिलडो को अपनी गांड में ले रही हूं। तुमने तो आज मेरे अंदर की गर्मी को पूरी तरीके से बढ़ा कर रख दिया है।

मैं- मुझे लगता है मेरा वीर्य बाहर आने वाला है तुम्हारी बड़ी गांड देखकर मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पा रहा हूं मेरा वीर्य पतन होने ही वाला है।

मनीषा- तुम्हारा वीर्य पतन हो ही गया और मुझे भी आज बड़ा मजा आ गया तुमने तो मेरे अंदर की गर्मी को मिटा कर रख दिया।

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