फोन पर बात करना बडा सुखद था

Hindi sexy story, desi sex chat:  सुहानी मेरे दोस्त की बहन है मैं अक्सर अपने दोस्त रोहित के घर जाता था तो सुहानी मुझे अक्सर देखा करती। सुहानी विदेशी से पढ़ाई करने के बाद घर लौटी थी और वह घर पर ही थी मैंने सुहानी से इस बीच में उसका नंबर ले लिया। सुहानी और मैं एक दूसरे से फोन पर चोरी छुपे बात करने लगे थे मैंने इस बारे में अपने दोस्त रोहित को कुछ भी नहीं बताया था और ना ही मैं उसे कभी इस बारे में कुछ बताना चाहता था लेकिन सुहानी तो एक नंबर के जुगाड़ किस्म की लड़की थी। उसने ना जाने कितने ही लंड लिए होगे उसने अब तक अपनी चूत में बहुत लंड लिए थे। वह सिर्फ मेरे लंड को लेने के लिए तड़प रही थी इस से ज्यादा कुछ भी नहीं था लेकिन एक दिन मुझे रोहित ने बताया हमने सुहानी की शादी तय कर दी है शायद रोहित के माता-पिता को भी सुहानी के बारे में पता चल चुका था। उन्होंने सुहानी की शादी  अचानक से ही करवा दी थी इसके बाद सुहानी का फोन मुझे काफी समय तक नहीं आया एक दिन उसका मुझे फोन आया तो वह मुझसे बात कर रही थी। उसके बाद उसने अपने फोन को किनारे रखा तो उसका पति उसे चोद रहा था उसकी सिसकियो कि आवाज मुझे फोन पर साफ सुनाई दे रही थी जब उसका पति उसे चोद कर पूरी तरीके से मजा ले चुका था तो उसके बाद सुहाने ने मुझसे बाताया और कहने लगी मैं तुमसे कल बात करती हूं। उस दिन तो मैंने अपने लंड को हिला कर ही काम चलाया लेकिन उसके बाद मैं सुहानी से मिलने के लिए बेताब था लेकिन मेरा उस से मिल पाना बिल्कुल भी संभव नहीं था क्योंकि उसका पति उसे घर से बाहर नहीं आने देता था। सुहानी अब घर की चारदीवारी में कैद होकर रह गई थी लेकिन हम दोनों फोन पर एक दूसरे से बातें करते मैं सुहानी से बात कर रहा था उस दिन उसने मेरी गर्मी को बढ़ा दिया था।

मैं- सुहानी कल तो तुम्हारे पति ने चोद कर तुम्हारी चूत का भोसड़ा बना दिया था लग रहा है कि तुम्हारे पति तुम्हें बड़े अच्छे से चोद रहे थे। वह तुम्हें अपनी गोद में उठाकर भी चोद रहे थे मुझे तुम्हारी सिसकारियां साफ सुनाई दे रही थी।

सुहानी- अगर तुमने इतना सब फोन पर सुन लिया था तो तुम्हें यह भी पता चल गया होगा कि मैंने अपने पति को किस तरीके से खुश कर दिया था और उन्हें मैंने पूरी तरीके से मजे दिए। उन्होंने मुझे उठा उठा कर चोदा और जब वह मुझे चोदते तो मैं खुश हो जाती लेकिन अब वह मुझे कहीं बाहर जाने नहीं देते जिससे कि मैं किसी के लंड को भी अपनी चूत में नहीं ले पाती हूं। मैं कई बार बहुत तड़पती हूं मैं सोचती हूं पहले तो ना जाने मैंने कितने ही लोगों के लंड अपनी चूत में लिए थे लेकिन अब मेरे पति मुझे कहीं जाने नहीं देते इसलिए मेरी आग बुझ नहीं पाती है।

मैं- सुहानी तुम तो तुम्हारे पति से मजे लेती हो लेकिन कभी हमारे बारे में भी तुमने सोचा है मै कितना तड़पता हू मैं तो इतना ज्यादा तड़पता हूं कि जब भी मैं सोचता हूं कि मैं तुम्हें कभी चोद क्यो नहीं पाया तो मैं तड़पते लगता हूं और तुम्हारी चूत मे मार ही नहीं पाया शायद तुम मेरी किस्मत में थी ही नहीं इसीलिए तो मैं तुम्हें चोद नहीं पाया लेकिन जब भी मैं तुम्हारे बारे में सोचता हूं तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता है और मैं खुश हो जाता हूं। तुम्हारे नाम की ना जाने कितनी बार मैंने मुठ मारी है और मुठ मारने में मुझे बहुत ही मजा आता है जब तुम्हारे नाम से मैं मुठ मारा करता हूं लेकिन मुझे तुम्हें अब चोदना है।

सुहानी- तो फिर तुम मेरे पास आ जाओ अगर तुम्हारे अंदर इतनी आग लगी हुई है तो मैं तुम्हारी आग कं बुझा दूंगी और तुम्हारे लंड से चूसकर तुम्हारा सारा पानी बाहर निकाल दूंगी जिसके बाद तुम मेरे लिए तड़पने लग जाओगे। मैं पहले ना जाने कितने ही लोगों को संतुष्ट कर चुकी हूं लेकिन शादी के बाद मैं घर की चारदीवारी में कैद होकर रह गई हूं।

मैं- सुहानी मैं तो तुम्हारे नाम से अभी भी अपने लंड को हिला रहा हूं मैं जब भी सोचता हूं कि तुम्हारा बदन कितना लाजवाब था। मुझे तुम्हारे नाम की मुठ मारना में बड़ा ही मजा आता है जब भी मैं तुम्हारे नाम की मुठ मारा करता हूं तो मेरे अंदर की आग और भी ज्यादा बढ़ जाती है।

सुहानी- मैं तुम्हें आज अपनी नंगी तस्वीर भेज कर खुश कर देती हूं तुम भी क्या याद रखोगे कि मैंने तुम्हें अपनी नंगी तस्वीर भेजी थी और तुम खुश हो गए थे। आज मैं तुम्हें अपनी नंगी तस्वीर भेजती हूं तुम बताना मेरा फिगर कैसा दिखता है बस तुम्हें थोड़ा सा इंतजार करना पड़ेगा क्योंकि मुझे कपड़े उतारने पड़ेंगे।

मैं- हां सुहानी मैं तुम्हारे लिए इंतजार करने के लिए तैयार हूं तुम जल्दी से अपने कपड़े उतार दो मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं मैं भी तो देखूं कि तुम्हारा बदन कैसा दिखता है।

सुहानी- रुको मैं तुम्हें अपनी तस्वीर भेज रही हूं बस अपने कपड़े उतार रही हूं मैं अपनी पैंटी को उतार रही हूं बस मैंने पैंटी उतार दी है। मैं तुम्हें अपनी तस्वीर भेज रही हूं जैसे ही तुम्हारे पास मेरी तस्वीर आएगी तो तुम्हें मजा आ जाएगा मैंने अपनी चूत की तस्वीर भी तुम्हें भेजी है।

मैं- तुम्हारी चूत तो बड़ी ही लाजवाब है तुमने नजदीकी से चूत की तस्वीर भेजी है तुम्हारी चूत से निकलता हुआ पानी भी मुझे साफ दिखाई दे रहा है और ऐसा लग रहा है जैसे कि मैं तुम्हें अभी चोदने के लिए आ जाऊं और तुम्हारी गर्मी को मैं मिटा कर रख दूं तुम वाकई में बड़ी कमाल की हो और अगर मैं तुम्हारे पास अभी होता है तो तुम्हें चोदकर तुम्हारी गर्मी को पूरी तरीके से मैं मिटा चुका होता।

सुहानी- चलो मैंने अब तुम्हें अपनी तस्वीर भेज दी है अब तुम क्या कर रहे हो क्या तुम अपने लंड को हिला रहे हो मैंने अपनी चूतड़ों को तुम्हारी तरफ किया हुआ है। तुम मेरी चूत के अंदर अपने लंड को डालकर मेरी खुजली को मिटा दो मैं भी अपने लंड मे आज बैंगन को लेने के लिए तैयार हूं मैं किचन से बैंगन ले आती हूं और उस पर आज मैं तेल की मालिश कर कर उसे ऐसा चिकना बना दूंगी कि वह मेरी चूत के अंदर जाएगा तो मेरी सारी खुजली को वह पल भर में ही मिटा देगा।

मैं- सुहानी क्या तुम्हारे पति घर पर नहीं है जो तुम मुझसे इतनी देर से बात कर रही हो। तुम आज अपनी चूत में बैंगन लेने के लिए भी तैयार हो मैं तो कसम से तुम्हारे लिए तड़प रहा हूं तुम्हारी चूत मारने के लिए मैं बहुत ज्यादा तडप रहा हूं।

सुहानी- मेरे पति तो आज घर पर नहीं है मैं अब बैंगन ले आई हूं मैं बैंगन को अपनी चूत में घुसा रही हूं क्या मजा आ रहा है या ऐसा लग रहा है कि यह बैंगन जैसे मेरे पति का काला लंड हो और यह मेरी चूत को फाड़ कर अंदर की तरफ जा रहा है। इस बैंगन ने तो मेरी चूत से पानी भी बाहर निकाल दिया है मैं बहुत ज्यादा तड़पने लगी हूं।

जिस प्रकार से वह सिसकारियां ले रही हो वह मेरे अंदर की आग को और भी ज्यादा बढ़ा रही थी मुझे लगने लगा था कि मेरा वीर्य बाहर की तरफ को गिरने वाला है और ऐसा ही हुआ मेरे लंड ने मेरे वीर्य को बाहर की तरफ छोड़ा दिया। मैंने सुहानी से कहा आज तुम्हारी इच्छा पूरी हो गई है और अब मैं फोन रख रहा हूं मैं तुमसे कल बात करूंगा। उस दिन वाकई में सुहानी से बात करने मे मुझे बहुत ही मजा आया और उस से काफी देर तक मैंने बात की उसने भी अपनी चूत के अंदर बैंगन को घुसा कर अपनी इच्छा को पूरा कर लिया था। उसके बाद सुहानी और मैं फोन सेक्स करके एक दूसरे की इच्छा पूरी करते। मेरा मन अब सुहानी को चोदने का था वह मौका मुझे मिल नहीं पाया पर फोन सेक्स पर वह मुझे हर रोज खुश कर दिया करती थी। हमेशा ही वह मेरी आग को बढ़ा दिया करती जब भी मैं उससे बात करता मेरे अंदर की आग पूरी तरीके से बढ़ जाती और मेरा वीर्य वह पल भर में ही बाहर निकाल देती थी।

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