मेरे हाथ को थाम लिया

Antarvasna, desi sex chat: अपनी शादीशुदा जिंदगी से परेशान होकर मैं अपने लिए कुछ तलाश कर रहा था मैं चाहता था कि कोई तो ऐसा हो जो मुझे समझ सके। मेरी तलाश उस वक्त पूरी हो गई जब मुझे फेसबुक पर रचना मिली। रचना की हर एक फोटो को मैं लाइक कर दिया करता था और उसकी फोटो पर मैं कमेंट कर दिया करता। रचना से शुरुआत में तो मेरी फेसबुक चैट के माध्यम से ही बात हुई और उसके बाद हम दोनों की बातें अब एक दूसरे से फोन पर भी होने लगी थी। मैंने रचना को अपने बारे में सब कुछ बता दिया था लेकिन रचना को इस से कोई भी आपत्ति नहीं थी। वह अपने कॉलेज की पढ़ाई कर रही थी रचना बीएससी की छात्रा है और मैं एक शादीशुदा व्यक्ति मेरी शादी को 5 वर्ष हो चुके हैं और अभी तक शादी से हमारे कोई बच्चा नहीं हो पाया है क्योंकि मेरी पत्नी की सेक्स के प्रति रुचि ही नहीं है जिसकी वजह से मैं बहुत ज्यादा परेशान रहता हूं। मैं बहुत अकेला भी हो गया हूं बिना सेक्स के जीवन अधूरा है और उसको पूरा करने के लिए रचना ने अपने हाथ को आगे बढ़ाया और उसका हाथ को मैंने थामा तो मेरी हर एक जरूरतों को वह पूरा करने लगी। पहले दिन रचना और मेरे बीच में एक दूसरे को लेकर बातें हुई। मैंने रचना को अपने बारे में सब कुछ बता दिया था और उसे यह भी बता दिया था कि मैं शादीशुदा हूं लेकिन मैं अपने शादीशुदा जीवन से खुश नहीं हूं। मेरी शादीशुदा जिंदगी को लेकर वह मेरे साथ हर रोज बात किया करती थी। जब भी मेरा मन सेक्स करने का होता तो मैं रचना के साथ ही बात कर लिया करता था। मेरी पत्नी ने मुझे एक दो बार रचना के साथ बात करते हुए देख भी लिया था लेकिन उसके बावजूद भी इस बात से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता था क्योंकि मेरी पत्नी ने मुझे वह खुशियां दी ही कहां थी जो मुझे रचना दे पा रही थी। हम दोनों एक दूसरे से बहुत दूर थे लेकिन हमारा फोन ही हमारा साथी था मैं जब भी शाम को अपनी जॉब से घर लौटता तो हर रोज रचना को फोन कर दिया करता था। रचना का पेपर कुछ दिनों पहले था तो मैंने उसे फोन किया और उससे पूछा तुम्हारा पेपर कैसे हुआ।

मैं- हेलो रचना।

रचना- हां मुकेश कहिए आप क्या कर रहे थे।

मैं- मैं तो कुछ नहीं कर रहा था बस तुम्हारे बारे में ही सोच रहा था।

रचना- अच्छा तो तुम मेरे बारे में सोच रहे थे।

मैं- हां तुम्हारे बारे में ही तो सोच रहा था मैंने तुम्हें इसलिए फोन किया था कि तुमसे पूछ सकूं कि तुम्हारा पेपर कैसे हुआ है।

रचना- मेरा पेपर तो अच्छा हुआ और मैं भी सोच रही थी कि तुमसे बात करूंगी तो मुझे भी अच्छा लगेगा।

मैं- रचना मैंने तुम्हें इसलिए फोन किया था कि तुमने जो फोटो मुझे कल भेजी थी उसमें तुम बड़ी हॉट लग रही थी और तुम्हारे स्तन तो बहुत बड़े हो चुके हैं।

रचना- अब क्या करूं स्तन तो उम्र के साथ बडे ही होंगे।

मैं- मुझे बहुत ही अच्छा लगा जब मैंने तुम्हारे स्तनों को देखा और तुम्हारी फोटो के ऊपर मैंने अपने वीर्य की बारिश कर दी थी।

रचना- अच्छा तो आपने कल मेरी फोटो को देखकर मुट्ठ मार ली।

मैं- हां यार क्या करता मुझसे रहा ही नहीं गया और जबसे तुम्हारे बदन को देखा है तबसे मे अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पा रहा हूं और इसीलिए तो मैंने तुम्हारी फोटो को देखते ही मुठ मार दिया मेरा माल पता नहीं कब बाहर गिरा मुझे मालूम ही नहीं चल पाया।

रचना- आपको मालूम है कल मैंने अपनी सहेली से डिलडो ले लिया है मैंने पहली बार डिलडो को देखा था मैं खुश हो गई। उसे मैंने कहा कि मुझे डिलडो इस्तेमाल करने के लिए दे दो मैं भी देखना चाहती हूं कैसे मजा आता है।

मैं- रचना लगता है तुम बहुत ही ज्यादा सेक्स के प्रति उत्तेजित होने लगी हो।

रचना- जबसे आपसे बात करनी शुरू की है तब से ही तो मेरे अंदर की आग और भी ज्यादा बढने लगी है और जब तक आपसे बात नहीं होती तब तक मजा कहां आता है।

मैं- अच्छा तो तुम्हें तब तक मजा नहीं आता जब तक तुम अपनी चूत में कुछ डालती नहीं हो।

रचना- अब आप ही देख लीजिए मुझे इतना मजा आ रहा है मैंने अपनी चूत में डिलडो को डाल रखा है और आपके लंड की कल्पना कर के मैं उसे अंदर बाहर कर रहा हूं मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है।

मैं- रचना तुम तो मुझसे भी एक कदम आगे निकली मैंने तो अभी आपने लंड को पैंट से बाहर निकाला ही है और अपने हाथ में लिया है। क्या तुम मेरे लंड को अपने मुंह में लोगी?

रचना- हां क्यों नहीं आप मेरे मुंह के अंदर अपने लंड को डाल दीजिए मैं उसे चूसकर अपना बना लूंगा और मुझे आपके लंड को चूसने में मजा भी तो बहुत आता है।

मैं- लो अपने मुंह को खोलो और मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर समा लो।

रचना- मैने अपने मुंह को खोल लिया है आप अपने लंड को मेरे मुंह के अंदर प्रवेश करवा दीजिए मैं आपके लंड को चूसती रहूंगी।

मैं- लो तुम्हारे मुंह के अंदर डाल दिया अब तुम चूसते रहो तुम्हें मजा आता रहेगा।

रचना- हां मैं आपके लंड को चूसती रहूंगी और अपनी चूत में डिलडो को भी ले रही हूं मुझे बहुत अच्छा लग रहा है और बड़ा मजा भी आ रहा है।

मैं- मेरे अंदर की आग को भी तुमने बढ़ा दिया है और मेरे लंड से भी पानी की बूंदे बाहर निकलने लगी है।

रचना- आपकी पत्नी तो आपकी तरफ देखती भी नहीं है।

मैं- रचना तुम मेरी पत्नी की बात मत करो बेकार में मेरा मूड खराब हो जाएगा।

रचना- अच्छा बाबा ठीक है उसकी बात मैं नहीं करूंगी लेकिन मेरी चूत के अंदर बाहर जब डिलडो जा रहा है तो मुझे बड़ा मजा आ रहा है।

मैं- मजा तो मुझे भी बहुत आ रहा है और अब मैं अपने लंड को हिला रहा हूं मुझे ऐसा लग रहा है जैसे कि मैं अपने लंड को सिर्फ हिलाता रहूं।

रचना- मेरी चूत से खून भी निकलने लगा है।

मैं- क्या बात कर रही हो तुम्हारी चूत से खून निकल रहा है।

रचना- यह डिलडो बहुत ही ज्यादा मोटा है कम से कम इसकी मोटाई आपके दो लंड जितनी तो होगी और लंबा भी बहुत है।

मैं- अच्छा तो इसकी मोटाई मेरे दो लंड जितनी है तभी तो मैं इतनी देर से मादक आवाज मैं तुमसे बात कर रही हूं।

रचना- हां मुझे तो बहुत अच्छा लग रहा है और इसे अपनी चूत के अंदर बाहर करने में बड़ा सुकून मिल रहा है और बहुत अच्छा महसूस हो रहा है। मुझे तो ऐसा लग रहा है जैसे कि इसे बस अपनी चूत के अंदर बाहर लेती रहूं।

मैं- मेरा माल तो बाहर गिरने वाला है।

रचना- मेरी आग बहुत ज्यादा बढ़ने लगी है और लग रहा है कि शायद अब भी ज्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगी और ना ही मै डिलडो को ज्यादा देर तक अपनी चूत के अंदर ले सकती हूं।

मैं- मेरा तो हो चुका है और मैं आप बाथरूम में जा रहा हूं, मैं सोच रहा हूं कुछ देर आराम कर लेता हूं तुमसे फिर बात करूंगा।

रचना- ठीक है मैं भी आपसे बाद में बात करूंगी मेरी भी हालत खराब हो चुकी है और मेरी चूत का छेद बहुत चौड़ा हो चुका है उसे भी थोड़ी देर लगेगी तभी तो वह ठीक हो पाएगा।

मैं- ठीक है रचना बाद में हम लोग बात करते हैं अभी मैं आराम कर लेता हूं।

रचना- ठीक है बाय-बाय हम लोग बाद में बात करेंगे।

मैंने फोन रख दिया था। मै सोचने लगा काश मेरी पत्नी भी मेरे साथ ऐसा कर पाती मेरी पत्नी भी मुझे मजा दे पाती तो कितना अच्छा होता लेकिन मेरी पत्नी के अंदर तो जैसे सेक्स की भावना पैदा ही नहीं हो पाती थी। उस दिन ना जाने मेरी पत्नी को क्या हुआ और वह मुझसे अपनी चूत मरवाने के लिए तैयार हो गई। मैंने उसकी चूत फाड़ कर रख दी बड़ी मुश्किल से तो मुझे मौका मिल पाया था मैं भला उस मौके को कैसे छोड़ सकता था। मैंने उसकी चूत से उस दिन खून भी निकाल दिया और उसे तब चोदता रहा जब तक वह थक ना गई। उसने उस दिन मेरी इच्छा पूरी की और मैं थकान से चूर होकर अपने बिस्तर पर लेट चुका था क्योंकि मुझे बहुत ही ज्यादा थकान हो रही थी। रचना के साथ फोन सेक्स और उसके बाद अपनी पत्नी के साथ सेक्स कर के मैं थक चुका था।

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